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सुप्रीम कोर्ट ने दलित और आदिवासी समाज के हक में दिया ये ऐतिहासिक फैसला,



हिन्दुस्तान में जाति व्यवस्था एक कुरूतीके तौर पर हमेशा से हमारे समाज में जड़ जमाए बैठी है. इस जातिवादी मानसिकता के शिकार आज भी लोग हो रहे हैं.लेकिन इस मानसिकता को बदलने के लिए अब सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है. कोर्ट ने आदेश दिया है कि अब सार्वजनिक स्थान पर फोन पर अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) श्रेणी के खिलाफ जातिगत टिप्पणी करना अपराध है.

कोर्ट ने कहा है कि ऐसा करने वालों को पांच साल जेल की सजा सुनाई जा सकती है. इस फैसले के साथ ही कोर्ट ने इसी मामले में एक व्यक्ति के खिलाफ दायर आपराधिक सुनवाई को खारिज करने मना कर दिया. कोर्ट ने आरोपी शख्य के खिलाफ दायर की गई प्राथमिकी को भी रद्द करने से मना कर दिया है. बता दें कि इस शख्स पर अनुसूचित जाति की एक महिला के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप है.हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी के एक शख्स की याचिका खारिज कर दी थी. इस याचिका में अपने खिलाफ एक महिला द्वारा दर्ज करायी गई प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की थी.

याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा था कि मामले की सुनवाई की दौरान यह साबित करना होगा कि उसने महिला से सार्वजनिक स्थल से बात नहीं की थी. हालांकि आरोपी के वकील विवेक विश्नोई ने कहा कि उनके मुवक्किल ने जब महिला से बात की थी तब दोनों अलग-अलग शहरों में थे.इस कारण यह नहीं कहा जा सकता है कि आरोपी तब सार्वजनिक स्थान पर था.

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