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अगर आपके पास है अपना प्लाट है तो जश्न मनाइए, प्लाट पर मकान बनाने के लिए पैसा मोदी सरकार देगी



New Delhi :   यदि आपके पास भी अपना प्लॉट है तो सरकार की नई योजना आपके लिए फायदेमंद साबित होगी। सरकार की नई योजना के तहत भूखंड मालिकों को मकान बनाने के लिए एडवांस पैसा दिया जाएगा। दरअसल केंद्र सरकार का संकल्प है कि वर्ष 2022 तक हर व्यक्ति के पास अपना मकान होना चाहिए। इसके लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री आवासीय योजना (पीएमएवाई) के तहत सरकार होम लोन पर सब्सिडी दे रही है। अब सबके लिए आवास शहरी मिशन में खुद का भूखंड रखने वाले आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को यूपी सरकार ने बड़ी राहत दी है।

50 हजार रुपए एडवांस : पीएमएवाई योजना के तहत चौथी श्रेणी में आने वाले लाभार्थियों का आवेदन स्वीकार होते ही भवन निर्माण के लिए 50 हजार रुपए एकमुश्त खाते में ट्रांसफर कर दिए जाएंगे। जबकि अभी तक व्यवस्था थी कि आवेदन स्वीकार होने के बाद भवन निर्माण शुरू करना होगा। पहली किस्त नींव (फाउंडेशन) तैयार होने के बाद ही जाती थी। सरकार के इस कदम से लाखों लोगों को फायदा होगा।

तीन किश्त में आएगा पैसा :
नए नियमों के तहत लाभार्थियों को दूसरी किश्त 1.50 लाख रुपए लेंटर (छत) डालने से पहले दी जाएगी। वहीं निर्माण कार्य पूरा होने पर आखिरी किश्त के रूप में 50 हजार रुपए दिए जाएंगे। इस बाबत प्रमुख सचिव मनोज कुमार सिंह ने आदेश जारी किए हैं। इस तरह लाभार्थी को मकान बनाने के लिए कुल 2.50 लाख रुपए की मदद सरकार की तरफ से की जाएगी।

आवास शहरी मिशन की चार श्रेणियां :
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सबके लिए आवास शहरी मिशन को चार श्रेणी में विभाजित किया गया है। इसमें पहली ऋण आधारित ब्याज सब्सिडी योजना, दूसरी भूमि का संसाधन के रूप में उपयोग करके स्लम पुनर्विकास तीसरी भागीदारी में किफायती आवास (एएचपी) और आखिरी श्रेणी में लाभार्थी आधारित व्यक्तिगत आवास का निर्माण एवं विस्तार शामिल है। इस स्कीन का लोग खूब फायदा उठा रहे हैं। केंद्र सरकार का सपना है कि हर व्यक्ति के पास 2022 तक अपना मकान होना चाहिए।


शासन स्तर पर हुई समीक्षा में दी गई राहत
लाभार्थी आधारित व्यक्तिगत आवास श्रेणी का निर्माण एवं विस्तार के लाभार्थियों को अब तक नियमानुसार 1.50 लाख केंद्र व एक लाख राज्य सरकार द्वारा दिया जाता है। पहले के नियम में आवेदन स्वीकार होने पर लाभार्थी द्वारा नींव लेवल का निर्माण कार्य पूरा होने पर 40 फीसदी राशि दी जाती थी। शासन स्तर में समीक्षा हुई तो सामने आया कि इस श्रेणी में आने वाले अधिकांश लाभार्थियों आर्थिक रूप से इतने कमजोर हैं कि वे अपने संसाधनों से नींव लेवल तक का निर्माण नहीं करा सकते हैं।

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